भारत सरकार ने Income Tax 2026 के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं, जिनका सीधा फायदा खासकर मध्यम वर्ग को मिलने वाला है। नए बजट में सरकार ने टैक्स व्यवस्था को आसान बनाने और करदाताओं पर बोझ कम करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जिसने लंबे समय से लागू पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह ले ली है। इन बदलावों को समझना हर करदाता के लिए जरूरी है ताकि वे सही तरीके से अपनी टैक्स योजना बना सकें।
12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स से राहत
नए टैक्स सिस्टम के तहत सबसे बड़ी राहत यह है कि 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को व्यावहारिक रूप से टैक्स फ्री कर दिया गया है। यह लाभ धारा 87A के तहत मिलने वाली छूट के कारण संभव हुआ है। इस प्रावधान से वेतनभोगी और मध्यम आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि यह फायदा केवल नए टैक्स रीजीम को चुनने वाले करदाताओं को ही मिलेगा।
नए टैक्स स्लैब से व्यवस्था हुई आसान
सरकार ने Income Tax 2026 में टैक्स स्लैब को भी नए तरीके से व्यवस्थित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके बाद 4 से 8 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत और 8 से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत टैक्स लागू होगा। 12 से 16 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा, जबकि इससे अधिक आय पर क्रमशः 20, 25 और 30 प्रतिशत की दर लागू रहेगी। इससे करदाताओं के लिए टैक्स की गणना करना पहले से अधिक सरल हो गया है।
नया आयकर अधिनियम 2025 लागू
1 अप्रैल 2026 से देश में नया आयकर अधिनियम 2025 लागू कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स कानून को सरल और स्पष्ट बनाना है। पुराने कानून में मौजूद जटिल कानूनी भाषा और उलझनों को कम करने की कोशिश की गई है ताकि आम नागरिक भी आसानी से नियमों को समझ सकें। सरकार को उम्मीद है कि इससे टैक्स विवादों में कमी आएगी और कारोबार करने की प्रक्रिया भी सरल बनेगी।
निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े नए नियम
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब कंपनियों के शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि पर कैपिटल गेन की तरह टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शन ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स यानी STT की दरों में भी बदलाव किया गया है। इन परिवर्तनों के कारण सक्रिय ट्रेडर्स को अपने निवेश और टैक्स योजना पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
शिक्षा भत्ता और ULIP नियमों में बदलाव
सरकार ने बच्चों की शिक्षा से जुड़े भत्तों में भी बढ़ोतरी की है। इससे नौकरीपेशा माता-पिता को बढ़ते शैक्षणिक खर्च से कुछ राहत मिल सकती है। इसके साथ ही ULIP यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान से जुड़े टैक्स नियमों में भी बदलाव किया गया है। यदि किसी पॉलिसी का सालाना प्रीमियम तय सीमा से अधिक है तो उस पर अब कैपिटल गेन के नियमों के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा।
ITR भरने की समय सीमा बढ़ी
Income Tax 2026 के तहत आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख भी बढ़ाई गई है। जिन करदाताओं का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए अब रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त कर दी गई है। इससे वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों को अपने दस्तावेज तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक कर या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। टैक्स से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित रहेगा।








