ऑनलाइन टिकट बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ी, IRCTC ने 3 करोड़ से अधिक फर्जी खाते साफ किए

By Pooja Mehta

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IRCTC ने हटाए 3 करोड़ से अधिक फर्जी खाते, ऑनलाइन टिकट बुकिंग हुई और अधिक पारदर्शी

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आईआरसीटीसी पोर्टल पर बड़ी कार्रवाई की है। रेल मंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष तीन करोड़ से अधिक फर्जी अकाउंट हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, 13 हजार से अधिक संदिग्ध ईमेल डोमेन भी ब्लॉक किए गए हैं।

साइबर अपराध पर लगाम

रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, 4.07 लाख संदिग्ध पीएनआर से जुड़े मामलों में 408 साइबर क्राइम शिकायतें दर्ज की गई हैं। इससे टिकट दलालों पर अंकुश लगा है और वास्तविक यात्रियों को टिकट आसानी से मिलने लगी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि टिकटों की निष्पक्ष उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

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फर्जी खाते निष्क्रिय और रोके गए

वर्ष 2025 के दौरान 3.04 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय किया गया, जबकि 2.94 करोड़ खातों को अस्थायी रूप से रोका गया। इनमें से 1.80 लाख से अधिक खातों को जांच के बाद दोबारा सक्रिय किया गया। इससे साफ है कि रेलवे केवल वास्तविक यात्रियों को ही टिकट सुविधा देना चाहता है।

बुकिंग प्रणाली हुई और मजबूत

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आईआरसीटीसी ने एंटी-बॉट तकनीक का उपयोग करके लगभग 64 प्रतिशत संदिग्ध ट्रैफिक को रोकने में सफलता पाई है। इसके कारण ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली पहले से अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन गई है। चालू वित्त वर्ष के फरवरी तक 48.25 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक किए गए, जो कुल आरक्षित टिकटों का करीब 88 प्रतिशत है। वहीं, काउंटर से केवल 6.15 करोड़ टिकट बुक हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि यात्री अब डिजिटल माध्यम को अधिक पसंद कर रहे हैं।

आधार सत्यापन ने बढ़ाई पारदर्शिता

एक जुलाई 2025 से तत्काल टिकट और सामान्य आरक्षण के शुरुआती दिन की बुकिंग केवल आधार सत्यापित यूजर ही कर सकते हैं। इससे फर्जी अकाउंट के जरिए बड़े पैमाने पर की जाने वाली बुकिंग पर रोक लगी है। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की प्राथमिकता हमेशा सस्ती और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करना रही है।

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यात्रियों की सुविधा और संतुष्टि

रेलवे ने कोच संरचना में भी सुधार किया है। करीब 70 प्रतिशत डिब्बे जनरल और स्लीपर श्रेणी के हैं, जबकि 78 प्रतिशत सीटें नॉन-एसी वर्ग में उपलब्ध हैं। इससे आम यात्रियों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे ने यह भी कहा कि टिकट बुकिंग प्रणाली को बेहतर बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर सुधार किए जा रहे हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख पूरी तरह से जानकारी आधारित है और समाचार स्रोतों पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए तथ्य समाचार एजेंसियों और रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित हैं।

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