चांदी और सोने की कीमतों में भारी गिरावट, निवेशक हुए चौंकित
आज के ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमतों में आई अचानक और तेज गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर की कीमत 13 से 15 प्रतिशत तक गिरकर लगभग 67 डॉलर पर आ गई, और कुछ समय के लिए 65 डॉलर के नीचे जाने का दबाव भी महसूस किया गया। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है। सोने की कीमतें भी इस दौरान लगभग 5 प्रतिशत कम हुईं, जबकि सिल्वर ETF में 20 प्रतिशत तक और माइनिंग स्टॉक्स में 10 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली।
घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी की कीमतें 17,800 रुपये तक लुढ़क गईं, जबकि सोने के दाम भी 1,53,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गए। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी अब अपने जनवरी के उच्चतम स्तर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम से 41 प्रतिशत नीचे आ चुकी है। सोने की कीमत भी 29,700 रुपये या 16 प्रतिशत तक गिर गई है। इस अचानक गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता और सतर्कता की स्थिति पैदा कर दी है।
गिरावट के पीछे वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गिरावट अनपेक्षित वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों के जोखिम कम करने के फैसलों का परिणाम है। आमतौर पर वैश्विक तनाव जैसे ईरान के हालात में सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना-चांदी महंगा होता है, लेकिन इस बार बाजार का ट्रेंड उल्टा रहा। 2025 में सिल्वर में जबरदस्त तेजी और उसमें आई सट्टेबाजी ने भी इस गिरावट को तेज किया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला, क्योंकि मजबूत डॉलर में मेटल महंगे हो जाते हैं और उनकी मांग घटती है।
लीवरेज्ड ट्रेडिंग और मार्केट वोलैटिलिटी
लीवरेज्ड ETF और फ्यूचर्स ट्रेडिंग ने गिरावट को और अधिक तेज कर दिया। जैसे ही कीमतें गिरीं, कई निवेशकों को मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ा और जिनके पास अतिरिक्त पैसा नहीं था, उनकी पोजिशन अपने आप कट गई। इस प्रक्रिया ने बाजार में एक तरह का ‘डोमिनो इफेक्ट’ उत्पन्न किया, जिससे कीमतों में तेजी से गिरावट आई।
भविष्य का परिदृश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता और जोखिम कम करने का माहौल है। निवेशकों को अल्पकाल में वोलैटिलिटी की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि लंबी अवधि में चांदी की डिमांड, महंगाई और अन्य आर्थिक फैक्टर्स इसे सपोर्ट दे सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस समय अपने निवेश में सतर्क रहें और जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेशकों को किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत और विशेषज्ञ सलाह अवश्य लेना चाहिए।








