मंत्रिपरिषद का बड़ा फैसला: किसानों को एमएसपी पर मिलेगा अतिरिक्त लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की गई है। यह बोनस न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में सीधा फायदा होगा। बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता के बीच यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
एमएसपी के साथ बढ़ेगी किसानों की आय
सरकार द्वारा गेहूं का एमएसपी लगभग 2275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसमें 40 रुपये का बोनस जोड़ने पर किसानों को करीब 2315 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिल सकता है। इसका मतलब है कि किसान अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचकर अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई किसान 100 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो उसे 4000 रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा।
किसानों को कैसे मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले से किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बड़े किसानों के लिए यह लाभ और अधिक होगा, क्योंकि उनकी उत्पादन मात्रा ज्यादा होती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे भविष्य में अधिक निवेश कर सकेंगे।
सिंचाई परियोजना से बढ़ेगा उत्पादन
मंत्रिपरिषद ने रीवा जिले में पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना की लागत 228 करोड़ 42 लाख रुपये है और इससे लगभग 7350 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। जवा और त्योंथर तहसील के 37 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने से फसल उत्पादन बढ़ेगा और पानी का अधिक कुशल उपयोग संभव होगा।
पशुपालन क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गौपालन एवं पशुपालन विभाग करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव का उद्देश्य पशुपालन, विशेष रूप से गौपालन को बढ़ावा देना है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
किसानों के लिए सकारात्मक संकेत
इन सभी फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार खेती, सिंचाई और पशुपालन तीनों क्षेत्रों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। गेहूं पर दिया गया बोनस किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, खासकर तब जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। यदि किसान सरकारी खरीद केंद्रों का सही उपयोग करते हैं, तो उन्हें इस योजना का पूरा लाभ मिल सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। योजनाओं और दरों में समय-समय पर बदलाव संभव है। किसान किसी भी निर्णय से पहले संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।








